Wednesday, September 29, 2010

मजबूरी

कामगारों की भीड़, बेतहाशा बेरोजगारी, विशाल जनसँख्या यही तो पहचान रह गयी ह मेरे देश की! शायद यही कारन है कि आधुनिक कसम प्रदाता कम पैसों में ज्यादा कम लेने कि तमन्ना पाले उनका शोषण कर रहे हैं ! उनकी दुविधा भी देखी कि वो कम मेहनताने में ही काम करने को मजबूर हैं!