Thursday, August 5, 2010

यक्ष prashna

इश्वर इस स्रष्टि को बनाने के बाद या तो इतना खुश है की कही पार्टी मन रहा है या इतना शर्मिंदा है की वो हमारे सामने आने की हिम्मत नहीं कर रहा है!
अखबार में कम अपने मन लायक मिल गया है! साहित्य में रूचि तो थी ही अब लिखने में भी निखर आ जाएगा!